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आसान नहीं शिक्षा के अधिकार की राह

Posted On: 22 Nov, 2011 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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Kapil Sibbalशिक्षा और दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े मसलों पर जागरण के सवालों के जवाब दे रहे हैं केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल


मानव ससाधन विकास और दूरसचार जैसे दो भारी-भरकम मत्रालयों का कार्यभार सभाल रहे केंद्रीय मत्री कपिल सिब्बल फिलहाल बहुत सभलकर बोल रहे हैं। जनलोकपाल पर टीम अन्ना और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सीएजी के आकड़ों पर सवाल उठाने के बाद सिविल सोसाइटी से लेकर विपक्ष के निशाने पर आए सिब्बल विवादों में पड़ने के बजाय अपने दोनों मत्रालयों पर ही ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। बतौर मानव ससाधन विकास मत्री चाहे शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की बात हो या फिर दूरसचार मत्रालय में स्पेक्ट्रम आवटन से लेकर दूसरे विषय, उन्हीं मसलों पर वह ध्यान दे रहे हैं। ससद के आगामी सत्र में शिक्षा के क्षेत्र में कई विधेयक आने हैं तो 2जी मसले पर नित होते नए खुलासों और सरकार के भीतर बढ़ते विवादों पर कपिल सिब्बल से राजकिशोर ने बातचीत की। पेश हैं उसके प्रमुख अंश-


शिक्षा का अधिकार कानून बन गया है, क्या कुछ नतीजे सामने आ रहे हैं और क्या चुनौतिया हैं?

देखिए ये तो बहुत लबा रास्ता है। ये कोई छोटा रास्ता नहीं है कि सफलता तुरंत दिखने लगे। खासतौर से शिक्षा का जहा तक सवाल है तो ये तो आने वाले वर्ष ही बताएंगे कि किस हद तक आरटीई सफल रहा और शिक्षा में सुधार का बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ा।


आप प्रगति से सतुष्ट हैं?

इसका मैं हा या न में जवाब नहीं दे सकता। मगर अभी सभी राज्यों को इसके लिए बुनियादी ढाचा खड़ा करने में दो साल लगेंगे। हम कोशिश कर रहे हैं कि सभी राज्यों के लिए जल्द से जल्द अधिसूचना जारी हो जाए, ताकि हम उन्हें पैसा तुरंत देना शुरू कर दें। सभी राज्य सरकारें कोशिश कर रही हैं। तीन-चार साल बाद आपको असली प्रभाव दिखेगा।


राज्य आपसे ज्यादा धन माग रहे हैं और कह रहे हैं कि केंद्र नियमों पर अड़ियल रवैया अपना रहा है?

नहीं हम कतई नहीं अड़ रहे हैं। सिर्फ उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे दो-चार बड़े राज्यों का कहना है कि सौ फीसदी धन सरकार से मिलना चाहिए। यहा शिक्षा इतनी पिछड़ी हुई है कि राज्यों का कहना है कि उनके पास इसे लागू करने के लिए धन नहीं है। वे कह रहे हैं कि 32-35 फीसदी भार भी बहुत ज्यादा है। मगर बाकी राज्यों को कोई दिक्कत नहीं है।


तो इतनी बड़ी आबादी वाले राज्यों की माग पर आप क्या सोच रहे हैं?

शायद हमें यह सोचना पड़ेगा कि जमीनी स्तर पर स्थिति देखते हुए क्या करना चाहिए। हालाकि यह हम जरूर कहना चाहेंगे कि राज्यों की तरफ से ठहराव है। इस कानून का ढाचा देखो तो जब केंद्र और राज्य सरकार, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी, पचायत, एनजीओ, अभिभावक और बच्चे सभी तालमेल के साथ आगे नहीं चलेंगे तब तक इसे नहीं किया जा सकता। सामूहिक जिम्मेदारी का निर्वाह सबको करना होगा, तभी शिक्षा का अधिकार कानून सफल होगा।


काग्रेस और सहयोगी दलों के सासद भी शिक्षा सुधारों का विरोध कर रहे हैं। इसके चलते ससद में एक बार आपके मत्रालय का विधेयक भी गिर गया। सुना है कि आप इस दफा सबके साथ पहले ही बैठकें कर रहे हैं, क्या प्रतिक्रिया है उनकी?

मुझे पूरी उम्मीद है कि विधेयक ससद में इस दफा पारित हो जाएगा। दरअसल, जब बिल ससद में आता है तो कुछ शकाएं उस समय होती हैं। अगर पहले बातचीत हो जाए तो शका दूर हो जाती है। सत्र से पहले अपने सहयोगी दलों को बुलाया है और कोई भी सासद ऐसा नहीं था जो विरोध में हो।


अब बात आपको बाद में मिले दूरसचार मत्रालय की, 2जी जैसी गड़बड़ आगे न हो, इसके लिए क्या कुछ पुख्ता तत्र बनाने में सफल हो पाए हैं आप?

देखिए अब भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश ही नहीं है। हमने लाइसेंस और स्पेक्ट्रम अब अलग कर दिया है। अब हमारी नीति है कि स्पेक्ट्रम के दाम बाजार का तत्र तय करेगा। वह तत्र क्या होगा, यह तभी तय होगा जब हम स्पेक्ट्रम आवटन शुरू करेंगे। यह पारदर्शी हो इसके लिए पूरी तरह से इलेक्ट्रानिक माध्यम से आवटन होगा। गड़बड़ का सवाल ही नहीं।


अभी दूरसचार के लिए आपकी सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या है?

हम चाहते हैं कि बाजार मजबूत हो और दूसरे, दुनिया की जो बड़ी कंपनिया यहा नहीं आई हैं वे भी आएं। अगर वे आती हैं तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और स्पेक्ट्रम की कीमत भी ज्यादा मिलेगी। हालाकि धन हमारा मूल उद्देश्य नहीं है, लेकिन इससे अच्छी सेवाएं मिलने के साथ-साथ राजकोष भी मजबूत होगा।


आपने दूरसचार मत्रालय सभालते समय कई वायदे किए थे, मौजूदा विवादों की आच में कहीं वे पीछे तो नहीं छूट गए?

कतई नहीं, हमने जो वायदा किया था, सब बिल्कुल समय पर है। टेलीकाम पालिसी, आइटी पालिसी और एक मैन्युफैक्चरिंग पालिसी की हम घोषणा कर चुके हैं। जनवरी 2012 में इस पालिसी का अंतिम रूप सामने आ जाएगा। लाइसेंसिग और रोलआउट दिसबर 2011 से पहले हो जाएंगे। आप भरोसा रखिए कि दिसबर 2012 से पहले आने वाले वर्षो में इस सेक्टर की प्रतिष्ठा दोबारा स्थापित कराएंगे।


स्पेक्ट्रम आवटन पर कानून बनाने की बात है, क्या ससद के सत्र में इसे लाएंगे?

अभी ऐसी कोई बात नहीं है। अभी हम अपनी पालिसी तय करेंगे और हमारे सामने जो मुद्दे हैं, उन्हें देखेंगे। स्पेक्ट्रम एक्ट जरूर आएगा, लेकिन फिलहाल हम इसके आवटन में पारदर्शिता सुनिश्चित कर रहे हैं।


ग्रामीण क्षेत्रों में दूरसचार सुविधाएं देने के लिए यूएसओ फंड की सुविधा का क्या दुरुपयोग हो रहा है?

नहीं कोई विवाद नहीं है। हम मानते हैं कि उत्तर पूर्व या छत्तीसगढ़ जैसे तमाम सुदूर इलाकों में कंपनियों के लिए काम करना चुनौतीपूर्ण है। लेकिन सवाल यह है कि जब कंपनियों ने मत्रालय के साथ करार किया था तो उस समय भी उन्हें इन समस्याओं के बारे में तो पता ही था। मौजूदा हालात को देखते हुए हमने एक कमेटी गठित की है जिसकी रिपोर्ट के आधार पर हम अपना अगला कदम तय करेंगे।


आप ग्रामीण क्षेत्रों में दूरसचार सेवाओं का फायदा पहुंचाने की बात कर रहे हैं, लेकिन अभी सिर्फ 36 फीसदी आबादी इस सेवा का फायदा उठा पा रही है।

यह आगे बढ़ रहा है और हम करीब 45 फीसदी ग्रामीण भारत को सुविधा रहे हैं। हमें पूरा यकीन है कि अगले पाच सालों में 60 फीसदी ग्रामीण दूरसचार सेवा से लैस होंगे।


क्या वित्त मत्री प्रणब मुखर्जी ने आपको 3जी कंपनियों को रियायत देने की पैरवी वाला पत्र लिखा था, जिसे आपने खारिज कर दिया है?

.नहीं..नहीं. 3जी कंपनियों को रियायत देने पर मेरे पास कोई लेटर है। नहीं-नहीं ऐसा कोई लेटर नहीं आया।


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MANTU KUMAR SATYAM के द्वारा
December 21, 2013

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MANTU KUMAR SATYAM के द्वारा
December 21, 2013

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