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रोबोट करेंगे बहस

Posted On: 8 Oct, 2012 टेक्नोलोजी टी टी में

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रोबोट और कंप्यूटर एक दिन मनुष्य के साथ बैठ कर आगे की योजनाएं तय करेंगे, महत्वपूर्ण मसलों पर निर्णय लेंगे और उचित समाधान के लिए आपस में बहस भी करेंगे। रिसर्चरों के मुताबिक अगले तीन वर्षो में ऐसा मुमकिन है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन के एक नए रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत ऐसे सिस्टम विकसित किए जाएंगे, जिनकी मदद से कर्मचारी अपने रोबोट सहकर्मियों के साथ निर्णयों पर बहस करेंगे और कार्य योजनाएं तय कर सकेंगे। रोबोट और कंप्यूटर अपने निर्णय के पक्ष में दलील दे सकते हैं या अपने ऑपरेटरों को बता सकते हैं कि कुछ कार्यो को पूरा करना कठिन होगा। प्रमुख रिसर्चर डॉ. वामबर्टो वासकोन्सेलोस का कहना है कि हमारी रिसर्च का मुख्य मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी में मनुष्य का भरोसा बढ़ाना है। इस तरह के प्रारंभिक सॉफ्टवेयर तीन साल में उपलब्ध हो जाएंगे।


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रोबोट जैसे आटोनोमस सिस्टम आज आधुनिक उद्योगों का अहम हिस्सा बन चुके हैं और मनुष्य की निरंतर निगरानी के बगैर ही महत्वपूर्ण कार्यो को अंजाम दे रहे हैं। विभिन्न सेक्टरों में प्रयुक्त हो रहे ये सिस्टम किसी काम के बारे में निर्णय लेने से पहले बहुत सारी सूचनाएं तेजी से प्रोसेस कर सकते हैं और ऐसा करते हुए वे गलती भी कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में उनका मानव ऑपरेटर के साथ संवाद जरूरी है। वासकोन्सेलोस के अनुसार उनकी टीम द्वारा विकसित किए जा रहे सिस्टम मनुष्यों के साथ दोतरफा संवाद करने में सक्षम होंगे। साइंस फिक्शन में मनुष्यों के साथ बात करने वाले कंप्यूटरों के कई उदाहरण मौजूद हैं। जाने-माने विज्ञान कथाकार सर आर्थर क्लार्क के उपन्यास पर आधारित हॉलीवुड की चर्चित फिल्म 2001-ए स्पेस ओडेसी में हाल कंप्यूटर का उल्लेख है।


आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस यह कंप्यूटर अंतरग्रहीय यात्रा के दौरान यान की नियंत्रण प्रणालियों का रखरखाव करने के अलावा मनुष्य के साथ संवाद करने, चेहरे पहचानने और होंठों की हलचल को पढ़ने भी सक्षम था। फिल्म में एक दिन यह कंप्यूटर अपना संतुलन खो बैठता है और अपने सह मानव अंतरिक्षयात्रियों को मारने लगता है। वासकोन्सेलोस की टीम द्वारा विकसित किया जा रहा सिस्टम आवाज के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर शब्दों के जरिए अपने ऑपरेटर से संवाद करेगा। मनुष्य के साथ संवाद करने में सक्षम रोबोट का उपयोग दूसरे ग्रहों पर मानव रहित मिशन भेजने में किया जा सकता है। इसके अलावा गहरे समुद्र में अनुसंधान कार्यो, महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों के संचालन और परमाणु संस्थानों में प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने में ऐसे तरह के रोबोट उपयोगी होंगे। एक मानव ऑपरेटर कंप्यूटर से यह पूछ सकता है कि उसने अपना फैसला किस आधार पर किया, उसके सामने दूसरे विकल्प क्या थे और उनका पालन क्यों नहीं किया गया।


मानव ऑपरेटर चाहे तो कंप्यूटर द्वारा लिए गए निर्णय को पलट भी सकता है। हो सकता है सुपरवाइजर को कंप्यूटर द्वारा बताया गया समाधान पसंद नहीं आए। इसके जवाब में कंप्यूटर यह कह सकता है: माफ करना, मैं इतना ही कर सकता हूं या यह मुझे ठीक लग रहा है। कंप्यूटर में संवाद क्षमता उत्पन्न करते वक्त इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि कंप्यूटर का जवाब उग्र, धमकाने वाला या टकराव पैदा करने वाला नहीं हो। रिसर्चरों का दावा है कि रोबोट के साथ बातचीत करने से मनुष्य ज्यादा जिम्मेदाराना ढंग से पेश आएंगे क्योंकि विफलताओं का दोष कंप्यूटर की गलती पर नहीं मढ़ा जा सकेगा। सारी बातचीत रिकॉर्ड की जाएगी ताकि गलती होने पर दोषी का नाम सामने आ जाए। यदि रोबोट ज्यादा बुद्धिमान हो जाता है और मनुष्य के साथ बातचीत करने में सक्षम हो जाता है तो ऐसी मशीनों के रचयिताओं को रोबोट के लिए आचार-संहिता भी बनानी पड़ेगी।


लेखक मुकुल व्यास स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं


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Tag:Robot,Technology, Science, Computer, Artificial, Human Being, Work  रोबोट, कंप्यूटर, ब्रिटेन, यूनिवर्सिटी, डॉ. वामबर्टो वासकोन्सेलोस, टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर, आटोनोमस, मनुष्यों, आर्टिफिशियल



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